Sunday, January 17, 2016

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र - एक ही इंसान की दशा में समाये चारो

हिन्दू धर्म में चार जातीय वर्णण है .... ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र |

मेरे विचार में हिन्दू विचारधारा से छेड़ छाड़ की गई है, क्युकी यह चारो ही काम हर इंसान के हिस्से में आ रहे है तो फिर केवल ब्राह्मण को हक़ क्यों ईश्वर पूजा का, क्यों केवल क्षत्रिय ही बाहुबली, क्यों वैशय केवल व्यवसाय करने वाला और शूद्र को मल-मूत्र का काम सौंपा ????

मेरे विचार इसी विचारधारा पर ....

मेरे हिसाब से हर इंसान चाहे वो ब्राह्मण हो, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र हो .... दिखने में बिलकुल एक जैसे है, कोई भेद नही, अगर भेद होता तो ईश्वर उसकी रचना ही वैसे ही की होती, खैर अगली बात पर आते है के हर इंसान में यह चारो ही दशाएं पायी जा सकती है, हर इंसान की खोपड़ी जिसके इस्तेमाल से आप ब्रह्म में उत्तर सकते है, फिर बाजुओं से आप खुद की तथा औरो की रक्षा कर सकते है और हर वो काम कर सकते है जो क्षत्रिय कर सकता है, आपको आजीविका के लिए धन भी कमाना पड़ता है तो आप वैशय भी हो गए और आप सभी अपना मल-मूत्र भी रोजाना करते हो तो उसकी साफ़ सफाई भी आपका ही कर्तव्य बनता है तो आप में यह चारो ही गुण है परन्तु कैसे साजिशे रच के इस महान वर्णण को कहाँ जोड़ा और ताकतवर को अलग बाँट दिया जबकि ताकतवर कोई भी हो सकता है, एक तबके के लोगो को जो के गरीब होगा उस वक़्त को शूद्र करार दे दिया गया होगा, एक वर्ग को वैशय बना दिया होगा और सबसे उत्तम पद पर खुद बैठ गए होंगे |

खैर यह मेरे निजी विचार है, अगर किसी को इस बात से दुःख पहुचता हो तो मैं माफ़ी मांगता हूँ, परन्तु मेरे विचार विचारणीय अवश्य है |

रमन बिश्नोई 

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