Tuesday, July 8, 2014

ख़ामोशी भी गुनगुना देती...!

अर्ज किया है .....

के बेशक कदर नही मेरे लफ्ज़ो की तेरे आँगन में,
लेकिन याद बहुत आएगी जब तुम इन्ह लफ्ज़ो को ढूंढा करोगे |

हम जानते है दिल नही है तेरे सीने में,
वरना हरकत फूलों की भी इश्क़ सीखा देती |

जरूरत महसूस न होती कुछ सुनने की,
और ख़ामोशी भी गुनगुना देती |

No comments: