Wednesday, June 11, 2014

जीने के लिए, मरने का ज़माना चला गया .....!!!

के जबसे गुजरा है दौर तुमसे मिलने का,
रातों को छोड़, दिन का चैन चला गया |
महकते थे, मंद-मंद मुस्कुराते थे,
पैरों का थिरकना, जैसे चला गया |
अब तो मरने के लिए ज़ी रहे है,
जीने के लिए, मरने का ज़माना चला गया .....!!!
@Let us See.... who will find the Cause