Tuesday, September 3, 2013

क्रांति …… एक इल्तिजा बालाओं से।

जरूरत नही थी पिज़्ज़ा बर्गर खाने की,
 जरूरत नही थी हर सप्ताह मूवी देखने जाने की …!
सारा काम ख़राब किया है प्रचार कंपनियों ने,
 फिर उनके पीछे चलती कुछ लड़के लड़कियों ने …!
जब इतना बड़ा मुनाफा देश के बाहर जाएगा,
 रुपया बेचारा क्या करे, डॉलर यूँ ही जश्न मनाएगा …!
वीरो देश की लुटिया डूबने ना  दो,
 करो संकल्प और अपने असूलों को झुकने ना दो …!
करो प्यार स्वदेशी से खुशबु जिसकी देसी है,
 कहीं झलके माँ की तरह, कहीं लगता है सूरत इसकी कहीं देखी  है …!
कुछ नैतिककता का उधार करो,
कुछ देश का बेडा पार करो …!

लड़कियों से निवेदन इस प्रकार है ……। 

लड़का देसी चाहिए, खान पान क्यूँ विदेशी रखती हो,
 इतनी नफरत है अगर देसियों से,
फिर देसियों के पीछे क्यूँ आहें  हो ?
 अगर कपूत भी मिले तो याद उन्हें बोस, आजाद, भगत कराना,
बन जाना तुम लक्ष्मी बाई, बाँध पीठ पर  टुकड़े को,
 दुश्मनों को तुम लहू चखाना …!

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