Friday, September 27, 2013

भगत सिंह की दी हुई सोच / फोटो / कुर्बानी को बदनाम न करो ......!!!!

मैं आप सबके साथ एक घटना को प्रस्तुत कर रहा हुं।

पिछले सप्ताह जब मैं दिल्ली से अबोहर (पंजाब) अपने घर जा रहा था, मेरी टिकट पंजाब मेल 12137 रेलगाड़ी में पंजीकृत थी, समयनुसार में स्टेशन पंहुचा, गाडी आई और मैं अपने अपनी सीट पर जा के लेट गया, गाडी ने अपनी आखरी सिटी बजा दी थी, सब कुछ अच्छा सा लग रहा था, अछे अछे घरों के लोग गाडी में सफ़र कर रहे थे, कुछ क ने तो भगत सिंह की फोटो वाली टी-शर्ट भी पहन रखी थी.

फिर अचानक से कुछ लडकियाँ (अध्यापक) हमारे डब्बे में आ गयी जो के लगभग १० के करीब थी, इधर से गाडी भी चल पड़ी थी, उन लड़कियों को जनरल डिब्बे में जाना था, परन्तुं काफी भीड़ होने की वजह से वो शयनयान वाले डब्बे में आ गयी थी।  और फिर वो आपस में बातें करने लगी के कहाँ बैठा जाये, डब्बे में जितने भी यात्री सवार थे वो उन को देख देख कर ऐसे हस रहे थे के जैसे हम जंगल में किसी जानवर को देख कर हस्ते है। हसने में कुछ लड़कियां भी शामिल थी, परन्तु किसी ने भी अपनी सीट नही छोड़ी और वो लड़कियां बेचारी परेशान हो रही थी जैसे उन्हें समझ नही आ रहा हो के क्या किया जाये।

फिर मेरे ज़मीर ने मुझे सोने की इजाजत नही दी, और मैंने उनको कहाँ के आप मेरी सीट पर ४ बैठ सकती हो, मैं खड़ा हो के चला जाऊंगा, अक्सर सो के ही जाता हूँ। फिर मैंने अपने साथ वाले भाई को भी कहाँ के यह अपनी बहन, माताओं जैसी है तो वो भी मान गये और फिर एक और भी मान गया, और इस तरह वो सभी बैठ गयी थी और सारा डिब्बा हमें देख कर हैरान हो गया था।  जिन्होंने भगत सिंह की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनी थी, उनके सर शर्म से निचे हो गये थे, जो लड़कियां, लड़कियों की मदद नही करना चाहती थी, उन्होंने करवट ले थी जो धूर-घूर के देख रही थी। और इस तरह हम तीनो लडको ने सारी रात निकाल दी, और उन दोनों लडको के साहस को सलाम करने का दिल करता रहा और मुझे मेरे भाई जैसे ही लगे।

अफ़सोस इस बात का रहा के लड़कियों की मदद में लड़कियां आगे नही आई। और लड़के केवल लड़कियों को प्रभावित करने के लिए ही भगत सिंह की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनते नजर आये जबकि कुछ घंटों के लिए सीट नही छोड़ सकते, कैसे देशभगत है आजकल के नौजवान। ……. समझ नही आ रहा।

रमन बिश्नोई, अबोहर

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