Saturday, February 25, 2012

किसे कहते है इश्क !!!!

आज फिर एक बार यह सवाल उठा,
किसे कहते है इश्क ये ख्याल जगा !
महफ़िल सजी, चाँद लोग इक्कठा हुए,
हर एक की जुबां से अलग-अलग कहानी सुनी !

कुछ तो यह किस्सा सुनते-सुनते खयालो में खो गये,
कुछ यह किस्सा सुनाते-सुनाते खुद दास्ताँ हो गये !
यह बहस जो सदियों से चली आई है,
क्या है इश्क और क्या इसकी गहरायी है !

जो भी करता है इश्क,
या तो मरता है या दर दर भटकता है !
फिर क्यों हर हर दिल इश्क के पीछे,
बेबस हो कर चलता है !

बात थोड़ी बहुत समझ में आई,
अगर कोई किसी पे अपना सब कुछ लुटा सके,
उसके चेहरे पे थोड़ी सी हँसी ला सके,
"रमन" यही इश्क है यही खुदाई है, यही इश्क है यही खुदाई है 

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