Saturday, October 8, 2011

आवाज उठाई ...

कैसी रे बाबा तें इंसान गी जात है बनाई,
बात बात पर क्यों सगळा करे है लड़ाई !
जक्का ने तें रिपिया दे दिया,
बे तो करे रिपिया पर इती इती बड़ाई !
जक्का थोडा सा लारे न रह गया,
बे तो मुकाम जा जा बाबा देवे तन दुहाई !
छोटी सी बात रे मेरा जाम्भो जी,
किसे ने भी तेरे हुकम री समझ ना आई !
दूसरा गी तरक्की देख-देख,
खुद रे घरां में जक्का है आग लगाई !
मिल जुल गे रोह मेरे भाई बहनों,
बाबे रे घर में रमन, इती ही बस आवाज उठाई

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