Tuesday, September 13, 2011

ना हम इन्कार करते है !

जो हिम्मत वाले होते है,
वो तख्तो-ताज के हकदार होते है !
कैसे करेंगे हम इश्क भला,
बात बात पर तो फैसले चार होते है !
सोचा छोड़ दे उस नामुराद को,
माफ़ी मांगने पर भी हिसाब होते है !
बसा चुके है एस कदर उसे जिंदगी में,
न वो पीछा छोडती है ना हम इन्कार करते है !

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