Friday, August 26, 2011

भूख ....

पहली बार राजस्थानी में अपने विचार रखते हुए....... 
मीट बनाते हुए लड़की को देखा तो दिल इस तरह से अजीब सा हो गया ....

क्यों पेट री भूख तन इती सतावे,
बेजान प्राणी पर तन तरस ना आवे,

पापां री गांठडी तो आगे ही भारी,
बच्छे कुण तेरो बोझ बँट-आवे,

पेट री भूख तो २ रोटी में मिट जावे,
जीभ रा रस तो धरती हूँ पूरा ही ना आवे !

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