Saturday, June 18, 2011

यह दर्द ...

यह दर्द भी क्या चीज़ है, कभी तो शहद से मीठा, 
 कभी जहर सा लगता है ! 
मेरे अल्फाजो को यूँ जान ना आई होती, 
 अगर मैंने चोट ना खायी होती !
अगर तुम मिल जाती तो मेरी किस्मत अच्छी होती, 
 आज सरे आम यूँ तेरी बात ना चलायी होती !
मैं भूल भी जाता तेरे उन जख्मो को, 
 अगर तू मेरे सामने न आई होती !

2 comments:

Mrs. Asha Joglekar said...

दर्द को शब्दों में ढाल दिया ।

Raman said...

Bahut shukariya ..... yeh to mere mehboob ki reham navaji hai ke usne dard bech diya....ham to bas kharidaar hi nikle