Wednesday, May 25, 2011

मेरे नाम पे....

मोहब्बत कितनी करते है उनसे, 
 यह हम बता नही सकते !
चाहते है उसे एक खवाब की तरह, 
 लेकिन अब पा नही सकते !
पास रहना उसके चाहत है मेरी, 
 लेकिन फिर से दिल उसका दुखा नही सकते !
शायद चल जाये पेंसिल खुदा की, 
 लिख दे उसे फिर से मेरे नाम पे !

No comments: