Thursday, April 21, 2011

जब जब ......

जब जब संसार मैं कोई दिल से रोया है, ऐसा लगता है जैसे यह पूरी काएनात भी उसके साथ मिल गयी है रोने को .... फिर ऐसे बवंडर भी उठते है, आदमी सोचता है कि यह कुदरती है, लेकिन जिस दिल मैं वो खुद बैठा है, और उसको तोड़ने कि जब कोई कोशिश भी करता है, खुदा रूठ जाता है और आपना गुस्सा सबके सामने उतारता है | 


बुल्लेह-शाह जी ने खूब लिखा है ....... 
मंदिर ढाह मसीता ढाह .... ढाह दे जो कुछ ढाहिनदा |
एक बन्दे दा दिल न ढाहव़ी, मेरा रब्ब दिला विच रहिंदा ||

No comments: