Sunday, April 24, 2011

क्या करेगा .....

कहीं तो पत्थर मैं मूरत तेरी, कहीं मूरत में पत्थर दिल यहाँ |
साँझ हो जानी इस जीवन की एक दिन, क्यों पराया गधा कहलाया |
यह जीवन एक भरम-भुलेखा, यहाँ कोई ना तेरे साथ है |
जब तक खोजे ना कोई दिल अपना, तू एक भटकती आग है |
छोड़ दे अब धंधे पराये, कर ले अपने लिए कुछ काम तूं |
वरना एक दिन ऐसा आएगा, फिर क्या करेगा पछताए तूं |

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