Friday, January 7, 2011

तडपाना यार.....


एहसास तेरे जाने पर हुआ, कितनी की थी तुम्हे पाने की कोशिश !
मिटटी- हो गया हर सपना, देखा था जो मिलकर हमने !
तुमने ही दिखाई थी अंधी चाहत इस दुनिया की, खुद को जला कर यूँ !
अगर तुम यूँ छोड़ कर ना जाती, मुझ नादान को कहा समझ आती !
यही तरीका अच्छा था, मुझ पागल को समझाने का !
अब लोट के आजा मेरे दामन में, क्यों इतना तडपाना यार !

3 comments:

ehsas said...

गहरे एहसास लिए सुदंर रचना। आभार।

Raman said...

dhanyavaad ji

shubham said...

i have no word to describe when i read this.......