Thursday, January 6, 2011

फिर भी प्यास......

सुकून मिलता है उसकी बातों से, नहीं कटती अब रातें, बिन उनसे बातों के !
जब मोई याद वो आती है, एक अजीब सी लहर सीने में दोड़ जाती है !
ख़ुशी से झूम उठता है मन मेरा उस समय, बस वही उसकी इबादत हो जाती है !
एक नजर में प्यास बुझा देती है वो, जिसके लिए हम सालों तड़पते रहते है !
क्या जादू सा है उसकी आँखों में, क्यों वो मुझको ठगती जाती है !
लगती है वो छलिया, फिर भी दिल उसी पे मरता जाये !
उसने भी ऐसा तड़पना सिखा दिया है, पास तो समंदर है, फिर भी प्यास है !!!!!!

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