Sunday, October 31, 2010

कसूर !!!!

हर गिरा घूँघट हया का नही होता,
हर उठा हाथ दुआ का नही होता,
बुझ जाते है अक्सर दीये हमारी ही गलतियों से,
हर बार कसूर हवा का नही होता ..... !!!

4 comments:

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (1/11/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

Asha said...

बहुत खूब लिखा है |बधाई
आशा

अनुपमा पाठक said...

हर बार कसूर हवा का नही होता ..... !!!
satya hai...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत ..