Wednesday, October 27, 2010

अंदाज-ऐ-रुक्सत .....

मैं एक सदी से बैठा हुं, कोई ना गुजरा इस राह से .... !
जब मौत मांगी खुदा से, तब आया है कोई मिलने की चाह से .... !

ऐसा अक्सर क्यों होता है, जब भुला देते है उन सपनो को ... !
कोई बदलने आ जाता है, उन्हें हकीक़त में .... !

मौका मिलन कर हर बार आये,  जरूरी तो नहीं ... !
हम आपको बार बार तडपाये, जरूरी तो नहीं ... !
मिल कर तो सभी बिछड़ते है ....
बिछड़ कर मिल जाये कोई, जरूरी तो नहीं ... !

3 comments:

संजय भास्कर said...

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

Raman said...

धन्यवाद संजय !

ANU VISHNOI said...

nice one keep it up.........