Monday, October 18, 2010

मेरी जोड़ दियो.....

मैं पक्षी उस डाल का, टूटी जिसकी डाल !
 भरी उडान, पंख थे गीले, संग लिए स्वाभिमान !
आंधी आई बीच राह  में ओर आये तूफान !
 लेट गया छाया देख, हो गयी थी बड़ी थकान !
चोगा खाया, पानी पीया, करके कुछ विश्राम !
 अकेला उड़ता चला गया में, था सुखा बियाबान !
छोड़ा अपनों को पीछे मैंने, पहुंचा बीच अनजान !
 क्या मंजिल थी मेरी, कहा खो गयी मेरी पहचान !
आज पुकारो जब अपनों को, कहते भटक गया चितवान !
 मैं तो मन भावन हुं स्नेह का, प्रेम ही मेरी पहचान !
धुल जम गयी पंखो में, कर दो वर्षा मेरे प्रभु आन !
 में हुं उड़ता पक्षी लेकर टूटी डाल.,
प्रभु,रमन की जोड़ दियो अब डाल !!!!!!!!!

5 comments:

monika said...

kya baat hi raman ji .....wow....
nice thought.........kahaan se churayi hi....

Raman said...

अपने दिल से चुराई है
जो थी बात दिल में ,
बस वही जुबा पे आई है !!!!!!!

Vishal Watts said...

KYA BAAT HAI USTAAD

संजय भास्कर said...

बहुत पसन्द आया
हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद
बहुत देर से पहुँच पाया..........माफी चाहता हूँ..

Raman said...

दर्दे दिल हम सुनाते रहे .... बस कद्रदान आप जैसा चाहिए !