Wednesday, October 13, 2010

बिन किस्मत के .....

सजाये थे सपने मिलेंगे हम, 
 फिर मिलने को ही तरसे कैसे?
धड़कन को मुश्किल समझाया अपनी ,
 नम आँखों को समझाऊ कैसे ?
चैन से सोना चाहता हूँ में, 
 प्यास मिलन की भुझाऊ कैसे ?
हो तुम करुणा के सागर, 
 हमको बूंद-बूँद की खातिर तरसाया कैसे !
क्या हो गयी भुल हमसे, 
 यूँ बीच राह में भटकाया कैसे  !
नही हो किस्मत में तुम, 
 बिन किस्मत के तुमको पाऊ कैसे !!!

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