Saturday, March 20, 2010

बेचैनी सी ...

क्यों बेचैनी सी छाई है, याद किसकी आई है ......!
क्यों नहीं समझता कोई, यह कैसी रुसवाई है ......!

लोग खोजते खुदा को मंदिर -मस्जिदों में, यह कैसी खुदाई है .....!
तेरे बनाये मंदिर को ठोकर मार के, पत्थरों पे शमां जलाई है .....!
क्यों रुकता नही, क्यों संभालता नही, क्यों ऐसी आग लगायी है .....!
क्यों दिल भर आया उसके लिए, क्यों आँखों ने नमी दिखाई है .....!

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